Who is Yashwant Sinha: कौन हैं यशवंत सिन्हा जिन्हें विपक्ष (UPA) ने बनाया राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार? जानिए सबकुछ

By: गंगेश झा: President Election 2022: भारत का अगला राष्ट्रपति कौन होगा इसे लेकर सियासत तेज हो चुकी है। अब सभी की नजरें इस समय राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों पर टिकी हई है। विपक्ष (UPA) ने यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया है। यशवंत सिन्हा एक राजनीतिज्ञ और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व वरिष्ठ नेता और तृणमूलकांग्रेस के नेता रहे हैं। वे भारत के पूर्व वित्त मंत्री रहने के साथ-साथ अटल बिहारी वाजपेयी मंत्रिमंडल में विदेश मंत्री भी रहे है।

यशवंत सिन्हा

प्रारंभिक जीवन: यशवंत सिन्हा का जन्म 6 नवम्बर 1937 को बिहार के पटना के एक चित्रगुप्तवंशी परिवार में हुआ। सिन्हा ने 1958 में राजनीति शास्त्र में अपनी मास्टडिग्री प्राप्त की। इसके उपरांत उन्होने पटना विश्वविद्यालय मे 1960 तक इसी विषय की शिक्षा दी।

यशवंत सिन्हा 1960 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए और अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण पदो पर आसीन रहते हुए सेवा में 24 से अधिक वर्ष बिताए, ५ वर्षे तक उन्होने सव डिवीजनल मजदूर और जिला मजदूर के रुप में सेवा की। बिहार सरकार के वित्त मंत्रालय में 2 वर्षो तक अवर सचिव तथा उप सचिव रहने के बाद उन्होंने भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के उप सचिव के रूप में कार्य किया।

1971 से 1973 के बीच उन्होंने वॉन जर्मनी के भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात उन्होंने 1973 से1974 के बीच फ्रैंकफर्ट में भारत के कौसुल जनरल के रूप में काम किया। इस क्षेत्र में लगभग सात साल काम करने के बाद उन्होंने विदेशी व्यापार और यूरोपीय आर्थिक समुदाय के साथ भारत संबंधो के क्षेत्र में अनुभव प्राप्त किया।

यशवंत सिन्हा पढ़ने के साथ वागवानी, और लोगों से मिलने तथा अन्य अनेक क्षेत्रों में दिलचस्पी रखते हैं। वे व्यापक रूप से देश दुनिया में घुमे हुए है। कई राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधि मंड‌लो की अगुवाई कर चुके है। उन्होंने देश की ओर से कई वार्ताओ एवं आदान प्रदान में एक अग्रणी भूमिका निभाई थी। सिन्हा ने “कन्प्रेशंस ऑफ ए स्वाशी रिकॉर्नर ” नामक पुस्तक में वित्त मंत्री के रूप में अपने द्वारा विताए गए वर्षों का विस्तृत ब्यौरा दिया है।

राजनीतिक करियर

यशंवत सिन्हा ने 1984 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया और जनता पार्टी के सदस्य के रूप में सक्रिय राजनीति से जुड़‌ गए। 1986 में उनको पार्टी का अखिल भारतीय महासचिव नियुक्त किया गया और 1988 में उन्हें राज्य सभा का सदस्य चुना गया। 1989 में जनता दल के गठन होने के बाद उनको पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया। उन्होंने चन्द्रशेखर के मंत्रिमंडल में नवंबर 1990, 4 जून 1991 तक वित्त मंत्री रूप में कार्य किया

जून 1996 में वे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने। 1 मार्च 1998 में उनको वित्त मंत्री नियुक्त किया गया। उस दिन से लेकर 22 may 2004 तक संसदीय चुनावो के बाद और नई सरकार के गठन तक वे विदेश मंत्री रहे। उन्होंने भारतीय संसद के निचले सदन लोकसभा में बिहार (अब आरखंड ) के हजारीबाग निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि 2004 के चुनाव में हजारीबाग सीट से यशवंत सिन्हा की हार को एक विष्कारी घटना माना जाता है।

13 मार्च 2021 को सिन्हा ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर पुनः सक्रिय राजनीति में वापसी किया। टीएमसी में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया। टीएमसी में शामिल होने का वजह बताते हुए सिन्हा कहते हैं “देश दोराहे पर खड़ा है। हम जिन मूल्यों पर भरोसा करते हैं वे खतरे में है। न्यापालिका समेत सभी संस्थानों को कमजोर किया जा रहा है।

Leave a Comment

%d bloggers like this: