कुछ होंगे मेरे अल्फाज उनके लिए- नितीश भास्कर झा

मै नितीश झा आज आप लोगों से एक गुजारिश करना चाहता हूँ मेरी रचना को अगर आप लोग कॉपी करते है तो अनुरोध है आप लोगो से की वहां आप लोग मेरा नाम भी मेंशन कर दे ताकि किसी को ये न लगे की ये रचना मेरी नहीं है आप लोगो को सायद मै बता नहीं सकता की मेरी रचना को आप लोगो ने कॉपी करके मुझे कितना अकेला कर दिया है कोई अपना मुझे मेरी रचना को किसी और का बता रहा है और मुझी पे सबाल उठा रहा है। तो आज मै अपनी एक बहुत पुराणी सी रचना आप लोगो के सामने ले के आया हु आशा है आप लोग मेरी बाकि सारे रचना की भांति इसे भी बहुत प्यार देंगे।

शीर्षक – कुछ होंगे मेरे अल्फाज उनके लिए।

तेरी कुछ बात नहीं भूलूंगा,भले तेरे लिए अपनी सारी सपने भूल जाऊं पर तेरा साथ नहीं छोड़ूंगा।
क्या कहु तुम्हारे लिए समुद्र अगर तुझे देखे तो वो खुद की गहरारी भूल जाये। और अगर सूरज तुझे देखे तो वो खुद की चमक भूल जाये।

अगर कहना चाहूँ अपनी दिल की आवाज तेरी अस्मत में तो कुछ यूँ कहूंगा ,
मै तेरी हर नादानी को यूँ हस के टाल दूंगा , तेरी एक आवाज पर कही से भी दौरे- दौरे चला आऊंगा। तू बस प्यार से गले लगा लेना , मै इतने में ही संतुस्ट हो जाऊंगा।

मै तेरे लिए सायद चाँद तारे तोड़कर नहीं लाकर दे पाउँगा , पर तुम्हारे थक जाने पर चाय जरूर बना कर दूंगा।

सायद मै तुम्हे माथे का टिका लाकर नहीं दे पाउँगा , पर जब माथे पर बिखरे बाल परेशां करेंगे उन्हें सबार दूंगा ।

मैं भले ही तेरी कुछ सपने को सच करने में नाकाम हो जाऊ, पर तेरी हर सपने का हिस्सा जरूर बनूँगा।

मै सायद तुम्हे गुलाब लाकर नहीं दूंगा , पर तुम्हारे नाम के अनुरूप पलाश गुलमोहर के पेड़ लगा दूंगा ।और जब कुछ पढ़ना चाहोगी तो नारी वाद पर लिखी पुस्तकें ला दूंगा।

जिससे अपने अंतर मन में झांक सको ।
यह जो मेरा माकन है, यह तुमसे मेरा घर बना है।
इसलिए द्वार पर तेरे नाम की एक पट्टी लगा दूंगा।
तुम्हारे इस घर में थोड़ी सी जगह मुझे दे देना,
तब सायद मै चल फिर न पाऊं, थोड़ा तुझमे होगा परिवर्तन ,
थोड़ा मुझमे भी। तब तुम मुझे संभाल लेना , मै तुम्हारी हथेली थाम रखूँगा।

नितीश भास्कर झा

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