Google Doodle Today: कौन थीं बालामणि अम्मा? जिन्हें गूगल ने डूडल बनाकर किया याद

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Today’s Google Doodle celebrates the 113th birthday of Balamani Amma: बालामणि अम्मा एक प्रसिद्ध भारतीय कवि थी, जिसे मलयालम साहित्य की दादी के रूप में जाना जाता था। उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था।

Google Doodle Balamani Amma: Google आज डूडल बनाकर प्रसिद्ध भारतीय कवि बालामणि अम्मा (Balamani Amma) की 113वीं जयंती मना रहा है। यह डूडल केरल की कलाकार देविका रामचंद्रन द्वारा सचित्र की गयी है। आज का डूडल, एक प्रसिद्ध भारतीय कवि, जिसे मलयालम साहित्य की दादी के रूप में जाना जाता था उसको समर्पित है। आज ही के दिन 1909 में, बालमणि अम्मा (Balamani Amma) का जन्म त्रिशूर जिले में स्थित पुन्नयुरकुलम में उनके पैतृक घर नालापत में हुआ था। वह अपनी कविता के लिए अनगिनत पुरस्कार पा चुकी थीं, जिनमें सरस्वती सम्मान-देश का सबसे सम्मानित साहित्यिक पुरस्कार- और पद्म विभूषण-भारत गणराज्य का दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार शामिल हैं।

कौन थीं बालामणि अम्मा? (Balamani Amma)

नालापत बालमणि अम्मा (19 जुलाई 1909 – 29 सितम्बर 2004) भारत से मलयालम भाषा की प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक थीं। वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक महादेवी वर्मा की समकालीन थीं। उन्होंने 500 से अधिक कविताएँ लिखीं। उनकी गणना बीसवीं शताब्दी की चर्चित व प्रतिष्ठित मलयालम कवयित्रियों में की जाती है। उनकी रचनाएँ एक ऐसे अनुभूति मंडल का साक्षात्कार कराती हैं जो मलयालम में अदृष्टपूर्व है। आधुनिक मलयालम की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें मलयालम साहित्य की दादी कहा जाता है।

अम्मा ने कभी कोई औपचारिक प्रशिक्षण या शिक्षा प्राप्त नहीं की, बल्कि उनके चाचा नलप्पट नारायण मेनन, जो एक लोकप्रिय मलयाली कवि भी थे, ने उन्हें घर पर ही शिक्षा दी। उनके पास किताबों और कृतियों का एक प्रभावशाली संग्रह था जिसका अध्ययन अम्मा ने कम उम्र में किया था। 19 साल की उम्र में उन्होंने वी.एम. नायर से शादी की जो की एक मलयालम अखबार मातृभूमि के प्रबंध निदेशक और प्रबंध संपादक थे।

1930 में, 21 साल की उम्र में, अम्मा ने अपनी पहली कविता कोप्पुकाई शीर्षक नाम से प्रकाशित की। एक प्रतिभाशाली कवि के रूप में उनकी पहली पहचान कोचीन साम्राज्य के पूर्व शासक परीक्षित थंपुरन से हुई, जिन्होंने उन्हें साहित्य निपुण पुरस्कार से सम्मानित किया।

भारतीय पौराणिक कथाओं के एक उत्साही पाठक के रूप में, अम्मा की कविता ने महिला पात्रों की पारंपरिक समझ पर एक प्रकाश डालने का प्रयास किया। उनकी शुरुआती कविताओं ने मातृत्व को एक नई रोशनी में गौरवान्वित किया – उन्हें “मातृत्व की कवयित्री” के रूप में जाना जाने लगा। उन्होंने अपनी कविताओं में पौराणिक पात्रों के विचारों और कहानियों को अपनाया, लेकिन साथ ही उन्होंने अपनी कविताओं में महिलाओं को एक शक्तिशाली व्यक्ति के रूप में चित्रित किया। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में अम्मा (1934), मुथस्सी (1962) और मजुविंते कथा (1966) शामिल हैं।

सम्मान/पुरस्कार

बालमणि अम्मा को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। और उन्होंने कविता, गद्य और अनुवाद के 20 से अधिक संकलन प्रकाशित किए। वह कमला दास की मां भी थीं, जिन्हें 1984 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। अम्मा का 2004 में निधन हो गया और उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। बच्चों और पोते-पोतियों के प्रति उनके प्रेम का वर्णन करने वाली उनकी कविताओं ने उन्हें मलयालम कविता की अम्मा (माँ) और मुथस्सी (दादी) की उपाधि दी।

अम्मा को मलयालम साहित्य के सभी महत्त्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त करने का गौरव प्राप्त है। गत शताब्दी की सर्वाधिक लोकप्रिय मलयालम महिला साहित्यकार के रूप में वे जीवन भर पूजनीय बनी रहीं। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, सरस्वती सम्मान और ‘एज्हुथाचन पुरस्कार’ सहित कई उल्लेखनीय पुरस्कार व सम्मान प्राप्त हुए। उन्हें 1987 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से अलंकृत किया गया। वर्ष 2009, उनकी जन्म शताब्दी के रूप में मनाया गया।

बालामणि अम्मा की प्रमुख कृतियाँ

वर्ष 1928 में अपने कलकत्ता- वास के अनुभवों को समेटते हुए उन्होने अपने पतिदेव के अनुरोध पर अपनी प्रथम कविता ‘कलकत्ते का काला कुटिया’ लिखी थी। यह उनकी प्रथम प्रकाशित कविता है। उनका पहला कविता संग्रह “कूप्पुकई” 1930 में प्रकाशित हुआ था। उनकी समस्त प्रकाशित कृतियों का विवरण इस प्रकार है-

  • कूप्पुकई (1930)
  • अम्मा (1934)
  • कुटुंबनी (1936)
  • धर्ममर्गथिल(1938)
  • स्त्री हृदयम (1939)
  • प्रभंकुरम (1942)
  • भवनईल (1942)
  • ऊंजलींमेल (1946)
  • कालिकोट्टा (1949)
  • भावनाईल (1951)
  • अवार पेयदुन्नु (1952)
  • प्रणामम (1954)
  • और भी देखें….