
Shilpgram Bihar: क्या आपने कभी ऐसे गांव के बारे में सुना है जहां के हर घर में एक ‘आर्ट स्टूडियो’ हो? जहां की मिट्टी और दीवारों पर उंगलियां चलते ही एक शानदार पेंटिंग बन जाती हो? जी हां, हम बात कर रहे हैं बिहार के मधुबनी जिले में स्थित एक बेहद खास गांव— जितवारपुर (Jitwarpur) की।
अपनी अद्भुत मिथिला कला (Madhubani Art) के लिए मशहूर यह गांव अब एक नया इतिहास रचने जा रहा है। जितवारपुर अब बिहार का पहला ‘शिल्पग्राम’ (Craft Village) बन गया है। आइए, बेहद आसान शब्दों में जानते हैं इस गांव की खासियत और इस नए प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी दिलचस्प बातें।
3-3 पद्मश्री पुरस्कारों वाला देश का इकलौता गांव
करीब 400 घरों वाले इस छोटे से गांव की धमक पूरी दुनिया में है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जितवारपुर भारत का एकमात्र ऐसा गांव है, जिसने देश को एक-दो नहीं, बल्कि पूरे तीन ‘पद्मश्री’ विजेता दिए हैं। कला के क्षेत्र में इनके नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज हैं:
- जगदंबा देवी (साल 1975 में पद्मश्री)
- सीता देवी (साल 1980 में पद्मश्री)
- बउआ देवी (साल 2017 में पद्मश्री)
इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां के 90% से ज्यादा लोग खेती या नौकरी के बजाय हैंडीक्राफ्ट (हस्तशिल्प) पर निर्भर हैं। यहां के बच्चे-बच्चे की उंगलियों में कला बसती है। मधुबनी पेंटिंग के अलावा पेपर माशे (Paper Mache), सूजनी, सिक्की कला और टेराकोटा जैसे क्राफ्ट यहां के लोगों की दिनचर्या का हिस्सा हैं।
क्या है ‘शिल्पग्राम’ और इसमें क्या होगा खास?
शिल्पग्राम का मतलब है एक ऐसा गांव, जिसे विशेष रूप से कला, संस्कृति और शिल्प (Art and Craft) के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इस शानदार प्रोजेक्ट को भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय और बिहार म्यूजियम के सहयोग से धरातल पर उतारा जा रहा है। इस पर लगभग 9 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
शिल्पग्राम बनने के बाद जितवारपुर में क्या-क्या नया होगा?
- मॉडर्न गेस्ट हाउस: यहां आने वाले देसी-विदेशी पर्यटकों और कला प्रेमियों के रुकने के लिए आधुनिक सुविधाओं वाला 4 कमरों का शानदार गेस्ट हाउस बनाया जाएगा।
- क्राफ्ट स्टॉल्स: गांव में 12 खास स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां स्थानीय कलाकार अपनी कलाकृतियों को सीधे डिस्प्ले कर सकेंगे।
- खूबसूरत लैंडस्केपिंग: पूरे इलाके को एक टूरिस्ट स्पॉट की तरह डेवलप किया जाएगा, जिसमें सुंदर गार्डन और कॉमन फैसिलिटी सेंटर शामिल होंगे।
गांव वालों और कलाकारों को क्या फायदा होगा?
अब तक इन प्रतिभाशाली कलाकारों को अपनी मेहनत की सही कीमत पाने के लिए बिचौलियों (Middlemen) पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन शिल्पग्राम बनने से तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी:
- डायरेक्ट मार्केट: कलाकार सीधे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और खरीदारों को अपना सामान बेच पाएंगे, जिससे उन्हें उनकी कला का सही दाम मिलेगा।
- ग्लोबल पहचान: जितवारपुर की ‘ग्लोबल प्रोफाइल’ और मजबूत होगी। दुनिया भर के लोग यहां की संस्कृति और काम करने के तरीके को बिल्कुल करीब से महसूस कर सकेंगे।
- रोजगार और विकास: टूरिज्म बढ़ने से स्थानीय स्तर पर ही लोगों की कमाई के साधन तेजी से बढ़ेंगे।
जितवारपुर का बिहार का पहला ‘शिल्पग्राम’ बनना न सिर्फ मधुबनी के लिए, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक बेहद गर्व का पल है। यह गांव सदियों से अपनी कला के जरिए बिहार का मान बढ़ाता आ रहा है और अब यह नया रूप इसे दुनिया भर में एक नई पहचान देगा। अगर आपको कला और संस्कृति से प्यार है, तो भविष्य में बिहार का यह नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होना चाहिए!
यह भी पढ़े- मिथिला पेंटिंग, मधुबनी कला भारतीय चित्रकला की एक अद्भुत शैली, जाने खास बातें
