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संस्कृति

मधुबनी में 20-21 मार्च को ‘मिथिला महोत्सव’ का आयोजन, लोक संस्कृति और स्वाद का दिखेगा भव्य संगम

मधुबनी में 20-21 मार्च को ‘मिथिला महोत्सव’ का आयोजन, लोक संस्कृति और स्वाद का दिखेगा भव्य संगम

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Mithila Mahotsav 2026: मधुबनी में 20-21 मार्च 2026 को मिथिला महोत्सव का आयोजन होगा। जानें इस बार क्या है खास—मिथिला पेंटिंग, लोक संगीत, पारंपरिक व्यंजन और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा। मधुबनी: बिहार की सांस्कृतिक राजधानी मधुबनी एक बार फिर लोक संस्कृति के रंग में रंगने जा रही है। 20 और 21 मार्च 2026 को आयोजित होने वाला ‘मिथिला महोत्सव’ इस बार पहले से ज्यादा भव्य और खास होने वाला है। दो दिवसीय इस महोत्सव में मिथिला की कला, परंपरा, संगीत और व्यंजनों का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। मिथिला महोत्सव 2026 का आयोजन मधुबनी के वाटसन उवि परिसर स्कूल में किया जाएगा। दो दिनों तक चलने वाला यह कार्यक्रम सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक चलेगा। Mithila Mahotsav 2026 तारीख: 20-21 मार्च 2026 स्थान: वाटसन उवि परिसर स्कूल, मधुबनी, बिहार मुख्य आकर्षण: लोक संगीत, मिथिला पेंटिंग, पारंपरिक व्यंजन क्या होग...
उंगलियों का जादू और 3 पद्मश्री का गौरव: बिहार का ‘जितवारपुर’ बना राज्य का पहला शिल्पग्राम!

उंगलियों का जादू और 3 पद्मश्री का गौरव: बिहार का ‘जितवारपुर’ बना राज्य का पहला शिल्पग्राम!

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Shilpgram Bihar: क्या आपने कभी ऐसे गांव के बारे में सुना है जहां के हर घर में एक 'आर्ट स्टूडियो' हो? जहां की मिट्टी और दीवारों पर उंगलियां चलते ही एक शानदार पेंटिंग बन जाती हो? जी हां, हम बात कर रहे हैं बिहार के मधुबनी जिले में स्थित एक बेहद खास गांव— जितवारपुर (Jitwarpur) की। अपनी अद्भुत मिथिला कला (Madhubani Art) के लिए मशहूर यह गांव अब एक नया इतिहास रचने जा रहा है। जितवारपुर अब बिहार का पहला 'शिल्पग्राम' (Craft Village) बन गया है। आइए, बेहद आसान शब्दों में जानते हैं इस गांव की खासियत और इस नए प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी दिलचस्प बातें। 3-3 पद्मश्री पुरस्कारों वाला देश का इकलौता गांव करीब 400 घरों वाले इस छोटे से गांव की धमक पूरी दुनिया में है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जितवारपुर भारत का एकमात्र ऐसा गांव है, जिसने देश को एक-दो नहीं, बल्कि पूरे तीन 'पद्मश्री' विजेता दिए हैं। कला के क्ष...
मिथिला संस्कृति की पहचान मधुश्रावणी पूजा, आइए जानते हैं कैसे मनाया जाता है मधुश्रावणी का पर्व

मिथिला संस्कृति की पहचान मधुश्रावणी पूजा, आइए जानते हैं कैसे मनाया जाता है मधुश्रावणी का पर्व

संस्कृति
Madhushravani Vrat: मधुश्रावणी जीवन में सिर्फ एक बार शादी के पहले सावन को किया जाता है। नव विवाहिताएं बिना नमक के 14 दिन भोजन ग्रहण करेंगी। यह पूजा लगातार 14 दिनों तक चलते हुए श्रावण मास के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को विशेष पूजा-अर्चना के साथ व्रत की समाप्ति होती है। इन दिनों नवविवाहिता व्रत रखकर गणेश, चनाई, मिट्टी एवं गोबर से बने विषहारा एवं गौरी-शंकर का विशेष पूजा कर महिला पुरोहिताईन से कथा सुनती है। कथा का प्रारम्भ विषहरा के जन्म एवं राजा श्रीकर से होता है। इस व्रत के द्वारा स्त्रियाँ अखण्ड सौभाग्यवती के साथ पति की दीर्घायु होने की कामना करती है। व्रत के प्रारम्भ दिनों में ही नवविवाहिता के ससुराल से पूरे 14 दिनों के व्रत के सामग्री तथा सूर्यास्त से पूर्व प्रतिदिन होने वाली भोजन सामग्री भी वहीं से आती है। शुरु व अन्तिम दिनों में व्रतियों द्वारा समाज व परिवार के लोगों में अंकुर...
मिथिला की कला-संस्कृति को नया आयाम देने के लिए तैयार है ‘मिथिला हाट’, मुख्यमंत्री आज करेंगे लोकार्पण

मिथिला की कला-संस्कृति को नया आयाम देने के लिए तैयार है ‘मिथिला हाट’, मुख्यमंत्री आज करेंगे लोकार्पण

संस्कृति
मिथिला को शानदार सौगात: बिहार सरकार के जल संसाधन तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्री संजय कुमार झा ने किया लोकार्पण की तैयारियों का निरीक्षण संजय कुमार झा ने कहा, 'मिथिला हाट' (Mithila Haat Madhubani) के निर्माण से आसपास के क्षेत्र का तेजी से विकास होगा और रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे रंजन राजन- मधुबनी, 10 जनवरी, 2023: मिथिला को कल (बुधवार को) एक शानदार सौगात मिलने वाली है। मिथिला की कला-संस्कृति से देश-विदेश के लोगों को रूबरू कराने और बिक्री के लिए आधुनिक बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बिहार सरकार द्वारा 'दिल्ली हाट' की तर्ज पर मधुबनी जिले में झंझारपुर प्रखंड के अररिया संग्राम में एनएच 57 के किनारे नवनिर्मित 'मिथिला हाट' का मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार बुधवार को 'समाधान यात्रा' के दौरान लोकार्पण करेंगे। जल संसाधन सह सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्री संजय कुमार झा ने मंगलवार को अधिकारिय...
मिथिला पेंटिंग, मधुबनी कला भारतीय चित्रकला की एक अद्भुत शैली, जाने खास बातें

मिथिला पेंटिंग, मधुबनी कला भारतीय चित्रकला की एक अद्भुत शैली, जाने खास बातें

संस्कृति
Mithila Painting in Maithili: भारतक स्वाभिमान बिहारक गौरव मिथिला पेंटिंग, जे समस्त दुनिया मे मधुबनी पेंटिंग के नाम सँ जानल जाइत अछि, बिहारक एकटा प्रमुख चित्रकला शैली अछि, जाहि मे ग्रामीण परिवेश मे प्रकृति, धर्म आ सामाजिक संस्कारक चित्र उकेरल जाइत अछि। मिथिला पेंटिंग: मधुबनी पेंटिंग मिथिला की एक फोक पेंटिंग है, जो मिथिला के नेपाल और बिहार के क्षेत्र में बनाई जाती है। मिथिला पेंटिंग (Mithila Painting) में मिथिलांचल की संस्कृति कला को दर्शाया जाता है। मिथिला पेंटिंग को मधुबनी पेंटिंग और मधुबनी आर्ट (Madhubani Art) भी कहा जाता है। आज के इस लेख में हम मधुबनी पेंटिंग क्या है, इसका इतिहास क्या है, कैसे यह विश्व में प्रसिद्ध हुई, इसकी क्या खासियत है आदि के बारे में अध्ययन करेंगे। Mithila Painting in Hindi मधुबनी कला (या मिथिला पेंटिंग) भारतीय चित्रकला की एक शैली है, जो भारत के उत्तर बिहार...
मैथिली ग़ज़ल: कलमक हथियार सन हथियार की हेतै। धड़गड़ जिह्वा  सनक तलवार  की  हेतै।।

मैथिली ग़ज़ल: कलमक हथियार सन हथियार की हेतै। धड़गड़ जिह्वा  सनक तलवार  की  हेतै।।

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मैथिली ग़ज़ल (Maithili Ghazal) : गजल मूलतः अरबी शब्द छैक तँए ई बुझबामे कोनो भाँगठ नहि जे गजल नामक काव्य सर्वप्रथम अरबी भाषा सँ आएल छैक। गजल मने प्रेमिकाक आँचर सेहो होइत छैक ,गजल मने हिरणीक दर्द भरल आवाज सेहो होइत छैक, गजल मने प्रेमी-प्रेमीकाक (Maithili Prem Ghazal) गप्प सेहो होइत छैक धरि आब गजल एतय तक सिमित नहिं छैक कहबाक तात्पर्य जे जतेक विषय ततेक आ तेहन गजल। आब गजलमे भूख,गरीबी,दर्द, राजनीति,दहेज, आनो आनो बात सभ गजलकार आनि रहल छथि। आइ एकटा ओहन युवा गजलकारकेँ अभिलाष ठाकुर (Abhilash Thakur) गजल पढ़ब जे मैथिली गजलमे मैथिली गजल (Maithili Ghazal) कम समयमे बहुत पैघ नाम बना चुकल छथि तकर कारण रचनामे कथ्य,शिल्प भाव एकदम लाजवाब रहैत छन्हिं। मैथिली ग़ज़ल लेखक: अभिलाष ठाकुर 1. मैथिली ग़ज़ल कलमक हथियार सन हथियार की हेतै।धड़गड़ जिह्वा  सनक तलवार  की  हेतै।। चाहे &...